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Poetry/Limricks

तुकबंदी

8/6/2020

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Ensuing an instigating remark from her, an attempt at poetry(तुकबंदी). Template borrowed; words mine.
मुश्किल है अपना मेल प्रिय, यह प्यार नहीं है खेल प्रिय
तुम परवरिश तीनों बच्चों की, मैं बस मुँह चलाती राय हूँ
तुम कैस्पीयन का caviar, मैं ढाबे की फ़िश फ़्राय हूँ
तुम उदारता की लहराती फ़सल, मैं स्वार्थ की जलती तूड़ी हूँ
तुम शुद्ध घी में बना हलवा, मैं जले तेल की पूड़ी हूँ
तुम चारु तकनीक की राहुल द्रविड़, मैं उज्जड क्रिस गेल प्रिय
मुश्किल है अपना मेल प्रिय, यह प्यार नहीं है खेल प्रिय
तुम कर्मयोग का भव्य उत्सव, मैं आलस्य का भूला पर्व हूँ,
तुम फ़ेडरर का forehand, मैं सानिया की सैकंड सर्व हूँ
तुम शिष्टता का व्याकरण, मैं बेअदबी की बोली हूँ,
तुम Monaco का कोई villa, मैं धारावी की खोली हूँ
तुम auction Sotheby’s का, मैं मजबूर clearance sale प्रिय
मुश्किल है अपना मेल प्रिय, यह प्यार नहीं है खेल प्रिय
तुम धैर्य का ठोस आश्वासन, मैं आतुर here-and-now हूँ
तुम Maison Pichard का ताज़ा croissant, मैं बासी वड़े का पाव हूँ
तुम भाव का गहरा महासागर, मैं शब्दों का उथला ताल हूँ
तुम बर्फ़ी पर चाँदी का वरक़, मैं छाछ में आया बाल हूँ
तुम दृढ़ निश्चय का इंजन, मैं महज़ इरादों की रेल प्रिय
मुश्किल है अपना मेल प्रिय, यह प्यार नहीं है खेल प्रिय
तुम मनीषी एकाग्रता, मैं गफलतों का ढेर हूँ
तुम हिमालय की दुर्लभ बूटी, मैं रेगिस्तानी बेर हूँ
तुम किलेदार सी ज़िम्मेदार, मैं बेपरवाह क्षुब्ध नदी हूँ
तुम प्रगतिशील रवैय्या, मैं बीती हुई सदी हूँ
I could do this all day, for it’s an endless tale प्रिय
मुश्किल है अपना मेल प्रिय, यह प्यार नहीं है खेल प्रिय
यह प्यार नहीं है खेल प्रिय
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    Author

    Sachin Jha.

    Archives

    August 2020

    Categories

    All
    Poetry

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